कर्मचारी विरोधी सरकारें! ....तो कर्मचारी का दुःख दर्द समझने वाली सरकार है कौन?

कर्मचारी विरोधी सरकारें! ....तो कर्मचारी का दुःख दर्द समझने वाली सरकार है कौन?

2004 में पेंशन खत्म कर के बीजेपी कर्मचारी विरोधी हो गई,कांग्रेस उस समय विपक्ष में थी,कर्मचारीयों के हितैषी होने का दम्भ भरने वाली कांग्रेस ने चूं तक नहीं की,समाजवादी पार्टी और बसपा के आका जो कभी मास्टर हुआ करता थे,दल बल समेत संसद में बैठा करते थे,उन्होंने ने दिखावे मात्र का भी विरोध नहीं किया,उसके बाद भी कांग्रेस 10 वर्ष सत्ता में रही,सपा और बसपा की सरकारें उत्तर प्रदेश कायम थी,किसी ने भी एक बार भी 
कर्मचारियों की पीड़ा पर चर्चा करना तो क्या सुनना तक मुनासिब नहीं समझा,पुरानी पेंशन तो छोड़िए सपा और बसपा की सरकारें उत्तर प्रदेश के कर्मचारियो को नई अंशदायी पेंशन का भी लाभ नहीं दे पा रही हैं।
दो महीने पहले सातंवे वेतन का लाभ देने की घोषणा कर वोट बटोरने वाले अखिलेश बाबू की सरकार का सिस्टम अभी ग्रांट और nic के सॉफ्टवेयर का इंतिज़ार कर रहा है।
अब बताइये यदि बीजेपी कर्मचारी विरोधी है तो कर्मचारी का दुःख दर्द समझने वाली सरकार है कौन?