राजनैतिक पार्टियां हैं सिर्फ वोट की भूखी, सुप्रीमकोर्ट में सिर्फ केस की मेरिट एवं अच्छी पैरवी ही काम आएगी

राजनैतिक पार्टियां हैं सिर्फ वोट की भूखी, सुप्रीमकोर्ट में सिर्फ केस की मेरिट एवं अच्छी पैरवी ही काम आएगी

नीराश होने की जरूरत नही है ...सारी पार्टियां सिर्फ वोट की भूखी हैं..कहीं न कही हम अपने आप को राजनीतिक पार्टियों के समक्ष वोट बैंक के रूप में प्रस्तुत करने में विफल रहे हैं...



और हमारे विपक्षी इस मामले में पूर्णतया सफल रहे हैं....बसपा ने इनकी ट्रेनिंग प्रारम्भ की, सपा ने इनका समायोजन शुरू किया और जगदम्बिका पाल व वरुण गांधी के प्रयासों से इनका मुद्दा बीजेपी के मैनिफेस्टो में शामिल हुआ........लेकिन एक बात बिलकुल स्पष्ट रूप से जान लीजिए...होगा वही जो न्यायोचित होगा न कि किसी के कहने-सुनने से ......मोदी जी जी भी खुले मंच से शिक्षामित्रों के पक्ष में बोल चुके हैं...लेकिन हुआ क्या...जो न्यायोचित था....और आगे भी वही होगा जो कानूनी रूप से सही होगा......एक बात और ध्यान दीजियेगा.... राजनैतिक पार्टियों के इन चोचलों से घबराने या विचलित होने का कोई मतलब नही है...क्योंकि बीजेपी ही नही लगभग प्रत्येक राजनीतिक पार्टियां समाजवादी पार्टी के शिक्षामित्र प्रेम से अच्छी तरह अवगत हैं...इसलिए एकमुश्त वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए लॉलीपॉप देना इनकी मजबूरी है..... फिलहाल हमे सबकुछ भूल कर कोर्ट-कचहरी की तैयारी पर फोकस करना चाहिए...क्योंकि वहाँ कोई वोट बैंक नही चलेगा.....वहाँ सिर्फ केस की मेरिट एवं अच्छी पैरवी ही काम आएगी........और जो कुछ कोर्ट में होगा वही अंतिम होगा....रो-के, गा-के, कैसे भी सराकारों को कोर्ट के आदेश का पालन करना ही पड़ेगा...विश्वाश रखिये..सुप्रीम पावर कोर्ट के पास ही है...और वहीं से कल्याण होना है....5 वर्ष सत्ता में थी सपा.... क्यों नही बचा लिया शिक्षामित्रों को वहां से .....बीजेपी केंद्र में सत्ता में है...क्यों नही NCTE की गाइडलाइन्स को शिक्षामित्रों के पक्ष में अमेंड कर दिया...?सब नेताओं की चोंचलेबाजी है...इनसे घबराने जैसी कोई बात नही है अंत में एक बात और बीजेपी के घोषणा पत्र में कहा गया है कि शिक्षामित्रों के रोजगार सम्बन्धी समस्याओं को 3 महीने में न्यायोचित ढंग से सुलझाया जाएगा, और न्यायोचित क्या है, ये पूरा ज़माना जानता है