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UPPSC: आयोग में अटकी दो पीसीएस परीक्षाएं, 2017 ही नहीं 2016 की परीक्षा को लेकर असमंजस बरकरार

UPPSC: आयोग में अटकी दो पीसीएस परीक्षाएं, 2017 ही नहीं 2016 की परीक्षा को लेकर असमंजस बरकरार

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग के रवैये से सिर्फ पीसीएस 2017 की परीक्षा को लेकर ही असमंजस नहीं है, बल्कि 2016 की परीक्षा भी अब तक अधर में है। आयोग के ढुलमुल रवैये के कारण पिछले वर्ष की परीक्षा न तो संशोधित रिजल्ट तैयार हो रहा है और न ही हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ आयोग शीर्ष कोर्ट पहुंचा है। पिछले वर्ष की परीक्षा कब पूरी होगी और इस साल की परीक्षा कब कराई जाएगी? दोनों का 
वाजिब जवाब नहीं मिल रहा है। 1प्रदेश की कई अहम परीक्षाओं का पारदर्शी ढंग से आयोजन कराने के लिए उप्र लोकसेवा आयोग का अलग रुतबा रहा है। एक दौर ऐसा भी आया जब यहां बिना किसी की परवाह के नियम कानून बदले गए। हालांकि उस दौर में भी परीक्षा का आयोजन होता रहा और परिणाम भी घोषित रहे। इधर स्थिति बिल्कुल बदली है। परीक्षा को लेकर अफसरों की एक राय ही नहीं बन पा रही है। इसीलिए पीसीएस 2017 की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर सिर्फ अटकलें लग रही हैं।1 आयोग की ओर से जारी कैलेंडर की सबसे खास परीक्षा ही समय पर नहीं हो रही है, ऐसे में अन्य परीक्षाएं कैसे होंगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आयोग यदि परीक्षा पैटर्न में बदलाव के आधार पर देरी होने की दुहाई देता है तो उसे पिछले वर्ष पीसीएस परीक्षा का आकलन करना चाहिए। 1जिस तरह इस बार पीसीएस मुख्य परीक्षा का पैटर्न बदलने का प्रकरण शासन को भेजा गया। ठीक उसी तरह 2016 की परीक्षा में सीसैट को क्वालीफाइंग करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। उसका नोटीफिकेशन जनवरी के पहले सप्ताह में होना था, लेकिन दिसंबर 2015 के अंत तक शासन का अनुमोदन नहीं आया था। इस पर आयोग ने यह तय किया कि परीक्षा कराने में विलंब नहीं करेंगे सीसैट पूर्व की भांति लागू रहेगा।1 हालांकि नोटीफिकेशन जारी होने के कुछ दिन पहले ही शासन ने बदलाव पर मुहर लगा दी थी। इस बार आयोग को यह पता था कि कैबिनेट की मुहर के बाद ही पैटर्न बदल सकेगा, तब भी वाजिब निर्णय लेने में अब तक विचार चल रहा है। इसी तरह से बीते दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने पीसीएस 2016 की प्रारंभिक परीक्षा के तीन सवालों को बदलकर नया परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है। आयोग पिछले साल की मुख्य परीक्षा भी करा चुका है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब तक न तो संशोधित परिणाम घोषित हुआ और न ही आयोग हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष कोर्ट पहुंचा। दोनों परीक्षाएं अधर में अटकी हैं।
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