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UPPSC: दो माह में दूसरी बार आयोग कटघरे में, रह-रहकर निर्णय बदलता रहा, सीबीआइ जांच की ओर बढ़े कदम

UPPSC: दो माह में दूसरी बार आयोग कटघरे में, रह-रहकर निर्णय बदलता रहा, सीबीआइ जांच की ओर बढ़े कदम

इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग दो माह में दूसरी बार हाईकोर्ट के कटघरे में है। बीते नौ दिसंबर 2016 को ही हाईकोर्ट ने पीसीएस प्री 2016 परीक्षा के चार सवालों को बदलकर परिणाम जारी करने का आदेश दिया था। यह आदेश लोगों के जेहन में है, लेकिन आयोग कुछ भी मानने एवं करने को तैयार नहीं है। वह बार-बार गलतियां कर रहा है और उसे खामियां बताई भी जा रही हैं, पर उसकी बदलाव नहीं हो रहा है। 1पिछले पांच साल में 
आयोग को अपनी दो बड़ी भर्ती परीक्षाओं का पूरा परिणाम हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बदलना पड़ गया है। यही नहीं लोक सेवा आयोग की कोई ऐसी परीक्षा नहीं रही, जिसमें आयोग गलत सवाल या उसके जवाब को लेकर घिरा न हो।1संशोधित उत्तर कुंजी भी गलत: आयोग की पीसीएस हो या पीसीएस जे, समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी या सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा सामान्य चयन परीक्षा हो, लगभग हर बड़ी परीक्षा प्रतियोगियों के दखल के बाद सवालों के घेरे में आई है। कभी संशोधित उत्तर कुंजी जारी करके आयोग को खुद ही कई सवालों के जवाब बदलने पड़े या कभी उत्तर कुंजी में ही गलत जवाब शामिल हो गए। 1दो-चार नहीं बदले 14 सवाल: आयोग ने पीसीएस जे 2013 की परीक्षा में 14 प्रश्नों के उत्तर बदलने पड़े। समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी 2013 परीक्षा में न्यायालय ने आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को तलब किया था, जिसके बाद आयोग ने उत्तर कुंजी जारी किए जाने के अपने प्रस्ताव को ही छिपा लिया था। छात्रों के हाथ उत्तर कुंजी जारी किए जाने का प्रस्ताव लगा तो पीसीएस 2015 में न्यायालय के माध्यम से उत्तर कुंजी जारी करवाई जा सकी। इसमें पता चला कि आयोग ने नौ प्रश्नों का गलत उत्तर दिया था, छात्रों ने गलत उत्तर के मामले में पीसीएस 2015 को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी। 1यह भी सही और वह भी : कंबाइंड लोअर सबआर्डिनेट 2015 प्री परीक्षा परिणाम को रद करने के लिए भी कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। छात्रों का कहना था कि लोअर 2015 की संशोधित उत्तर कुंजी में पांच सवाल हटा दिए गए हैं, जबकि चार सवालों के दो उत्तर सही माने गए। आठ प्रश्नों के उत्तर का स्पष्ट प्रमाण प्रमाणिक पुस्तकों में है। 1सीबीआइ जांच की ओर बढ़े कदम : प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि एक बार फिर न्याय और प्रतियोगी जीते हैं। एक के बाद एक कई परीक्षाओं में गलत प्रश्न पूछने और कई जवाब होने के मामले पहले से मौजूद हैं ऐसे में अब आयोग की सीबीआइ जांच कराने का आधार और मजबूत हुआ है।